बादलों और लहरों में हो रहा था वाद-विवाद
बादल गरजे, “हम आए हैं पहले.”
लहरें बोलीं, “आप हमारे बाद.”

देख कर यह तकरार सागर हॅंसा, हॅंस कर किया ऐलान, “ना बादल ना कोई लहर, बस मैं ही हूँ शाम-ओ-सहर. मैं उड़ूं तो बादल बनूँ, झुंमू तो बनूँ लहर.”

शाम-ओ-सहर : हर वक़्त.

~ संजय गार्गीश ~