गुरु की प्रतीक्षा में

मिट्टी की तरह

सौम्य होकर रहो

की तुम पर उनके पांव पड़ें

तो चरण चिन्ह रह जाएं

 

गुरु की प्रतीक्षा में

ख़ुद को खाली कर दो

कि प्रेम वो बरसाएं

जब तुमको तरसता पाएं

 

गुरु की प्रतीक्षा में

श्वास रुक जाए तो भी

नाम रट न छूटे

हृदय से निकली हर करुण पुकार

माला मंत्र बन जाए

 

गुरु की प्रतीक्षा में

अविरल अश्रु धारा बहती रहे

कि उनकी चरणवंदना में

कमी न रह जाए

 

गुरु की प्रतीक्षा में

धैर्य का गर्भ धारण कर

मिलन की अभिलाषा पलने दो

कि वो आएं तो एक बालक की भांति उन्हें मिलो

 

गुरु की प्रतीक्षा में

यूं निर्मल वेश बना लो

कि हर आंख जो तुमको देखे

बस उनका प्रतिबिंब नज़र आए

 

गुरु की प्रतीक्षा में

विरह की यह पीड़ा

अंतरात्मा में समा लो

और अब मौन हो जाओ

 

प्रतीक्षा की यह अग्नि

तुम्हें तपा कर

इस लायक बनाए

कि उनकी कृपा को

तुम धारण कर सको

 

ॐ श्री गुरुभ्यो नमः। 🙏🏻

जय श्री हरि! 🙏🏻

PS: Who else is waiting with bated breath for Guru Purnima zoom satsang?

 

Picture Credit: Raimond Klavins on Unsplash